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पारंपरिक पाठ

तुलजाष्टकम्

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तुलजाष्टकम् [[लेखकः :|]]

तुलजाष्टकम्

||श्रीमद आद्य शंकराचार्य विरचित तुलजाष्टकम्||

दुग्धेन्दु कुन्दोज्जवलसुंदराङ्गीं

मुक्ताफलाहार विभूषिताङ्गीम|

शुभ्राम्बरां स्तनभरालसाङ्गीं

वन्देहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||१||

बालार्कभासामतिचा रुहासां

माणिक्य मुक्ताफल हार कण्ठीम|

रक्तांबरा रक्तविशालनेत्रीं

वन्देsहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||२||

श्यामाङ्गवर्णां मृगशावनेत्रां

कौशेवस्त्रां कुसुमेषु पूज्याम|

कस्तुरिकाचन्दनचर्चितांगी,

वन्देSहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||३||

पीताम्बरां चम्पक कान्ती गौरीम

अलङकृतामुत्तममण्डनैश्च|

नाशाय भूतां भूवि दानवांनां,

वन्देSमाद्यां तुलजाभवानीम् ||४||

चन्द्रार्कताटङ्कधरां त्रिनेत्रां

शूल दधानामतिकालरुपम|

विपक्षनाशाय धृतायुधां तां,

वन्देSहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||५||

ब्रम्हेन्द्र नारायणरुद्रपूज्यां

देवांगनाभि: परिगीयामानाम |

स्तुतांवचोभिर्मुनिनारदा द्यै:

वन्देSहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||६||

अष्टांग योगे: सनकादिभिश्च,

ध्यातां मुनीन्द्रैश्च समाधीगम्याम |

भक्तस्य नित्यम भूवी कामधेनुं,

वन्देSहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||७||

सिंहासनस्थां परिवीज्यमानां

देवै: समस्तैश्च सुचामरैश्च |

छत्रं दधाना अतिशुभ्रवर्णं

वन्देSहमाद्यां तुलजाभवानीम् ||८||

पूर्णः कटाक्षोSखिललोकमातु:

गिरीन्द्रकन्यां भजतामसुधन्याम |

दारिद्र्यकं नैव कदा जनानां

चिन्ता कुत:स्यात भवसागरस्य ||९||

तुलजाष्टकमिदं स्तोत्रं

त्रिकालं यः पठेत नरः |

आयु: कीर्ति यशो लक्ष्मी

धनपुत्रानवाप्नुयात ||१०||

इति श्रीमच्छङ्कराचार्या विरचितम तुलजादेवीस्तोत्रं संपूर्णम् ||

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