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विष्णु और कृष्ण

मधुराष्टकम्

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मधुराष्टकम् विष्णुस्तोत्राणि वल्लभाचार्य

Raghav

अधरं मधुरं वदनं मधुरं, नयनं मधुरं हसितं मधुरम् ।

हृदयं मधुरं, गमनं मधुरं, मधुराधिपतेरखi

लं मधुरम् ।।१।।

वसनं मधुरं, चरितं मधुरं, वचनं मधुरं वलितं मधुरम्,

चलितं मधुरं, भ्रमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।।२।।

वेणर्मधुरो रेणुर्मधुरः पाणिर्मधुरः पादौ मधुरौ,

नृत्यं मधुरं सख्यं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।३।।

गीतं मधुरं पीतं मधुरं, भुक्तं मधुरं सुप्तं मधुरम्,

रूपं मधुरं तिलकं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।४।।

करणं मधुरं, तरणं मधुरं, हरणं मधुरं, रमणं मधुरम्,

वमितं मधुरं, शमितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।५।।

गुञ्जा मधुरा माला मधुरा यमुना मधुरा वीची मधुरा,

सलिलं मधुरं, कमलं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।६।।

गोपी मधुरा लीला मधुरा, राधा मधुरा मिलनं मधुरम्,

दृष्टं मधुरं शिष्टं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।७।।

गोपा मधुरा गावो मधुरा, यष्टिर्मधुरा सृष्टिर्मधुरा,

दलितं मधुरं, फलितं मधुरं, मधुराधिपतेरखिलं मधुरम् ।।८।।

|| इति श्रीमद्वल्लाभाचार्य विरचित मधुराष्टकं संपूर्णं || || श्रीकृष्णार्पणमस्तु ||

स्रोत, लाइसेंस और पाठ सूचना

मधुराष्टकम् — sa.wikisource.org contributors

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