मल्हारीकवचम्
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ll श्री गणेशाय नमः ll
अस्यश्रीमल्लारीकवचमंत्रस्य l स्कंदऋषिः l
श्रीमल्हारीदेवता l अनुष्ठुपछंदःl श्रीमल्लारीकवचजपेविनियोगःll
सनत्कुमार उवाच l
मुनीनां सप्तकोटीनां l वरदं भक्तवत्सलम l
दुष्ट मर्दन देवेशं l वंदेहं म्हाळसापतिम ll
अनुग्रहाय देवानां l मणिरत्नगिरौस्थितं l
प्रसन्नवदनं नित्यं l वंदेहं मल्ल वैरिणं ll
सर्वदेवमयं शांत l कौमारं करुणाकरं l
आदिरुद्र महारुद्र l वंदेहं सवित्वकप्रियम ll
भुक्तीमुक्ती प्रदं देवं l सर्वाभरणभूषितं ll
कोटिसूर्यप्रतीकाशं l वंदेहं असुरांतकं ll
आदिदेवं महादेवं l मल्लारी परमेश्वरम l
वीरस्त्वस्त्याविरुपाक्षं l वंदेहं भक्तवत्सलं ll
भोगरूपपरं ज्योतिः l शिरोमाला विभूषितं l
त्रिशलादिधरं देवं l वंदेहं लोकरक्षकं ll
इदं पठति यो भक्त्या l मल्लारी प्रतिकारकं l
भक्तानां वरदं नित्यं l प्रणतोस्मिमहेश्वरं ll
वने रणे महादुर्गे l राजचौर भयोप्युत l
शाकिनीडाकिनीभूत l पिशाचोरगराक्षसःl
ग्रहपिडासु रोगेषु l विषसर्पभयेषुच ll
सदा मल्लारीमल्लारी l मल्लारीतिकीर्तनं l
सप्तजन्मकृतं पापं l तत्क्षणादेव नश्यति ll
त्रिकालेतु पठे नित्यं l विष्णू लोकंस गच्छंती l
देहांतेतु तप्राप्नोती l सर्व लोके महीयते ll
इति श्रीब्रह्मांडपुराणे l क्षेत्रखंडे मल्लारीमहात्मे l
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