सर्वमङ्गल प्रार्थना
देवी को प्रणाम का एक पारंपरिक श्लोक। यह अंश है, संपूर्ण स्तुति नहीं।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
O blessing within all that is auspicious, gracious fulfiller of worthy aims, refuge, three-eyed Gauri and Narayani: I bow to you.
स्रोत, लाइसेंस और पाठ सूचना
संग्रह पर लौटेंDevi Mahatmya, Narayani Stuti, chapter 11; single traditional verse. Ancient Sanskrit text; original English meaning. Edition-specific numbering and spelling review pending.
पारंपरिक लघु चयन। अंग्रेज़ी भावार्थ इस पोर्टल के लिए लिखा गया है।
पारंपरिक पाठांतर हो सकते हैं। विशेषज्ञ पाठ और भाषा समीक्षा अभी लंबित है। पाठ में आए कथन भक्ति परंपरा का भाग हैं; स्वास्थ्य, धन या अन्य परिणाम की गारंटी नहीं हैं।