एकश्लोकिरामायणम्
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एकश्लोकिरामायणम् रामस्तोत्राणि [[लेखकः :|]]
छंद = १८ वृत्तं = शार्दुलविक्रीडित
आदौ रामतपोवनादिगमनं हत्वा मृगं कांचनं
वैदेहीहरणं जटायुमरणं सुग्रीवसंभाषणम् ।
वालीनिर्दलनं समुद्रतरणं लंकापुरीदाहनं
पश्चाद्रावणकुंभकर्णहननमेतद्धि रामायणम् ॥
॥ एकश्लोकि रामायणं संपूर्णम् ॥
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