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पारंपरिक पाठ

नखस्तुतिः

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नखस्तुतिः विष्णुस्तोत्राणि श्रीमदानन्दतीर्थाः

पान्त्वस्मान् पुरुहूत वैरि बलवन् मातङ्ग माद्यद्घटा ।

कुंभोच्चाद्रिविपाटनाऽधिकपटु प्रत्येक वज्रायिताः ।

श्रीमत्कण्ठीरवास्यप्रततसुनखरा दारिताराऽतिदूर ।

प्रद्ध्वस्त ध्वांत शांत प्रवितत मनसा भाविता भूरिभागैः ॥ १॥

लक्ष्मीकांतसमंततोऽपिकलयन् नैवेशितुः ते समम् ।

पश्याम्युत्तमवस्तु दूरतरतो पास्तं रसो योऽष्टमः ।

यद्रोशोत्कर दक्षनेत्रकुटिलः प्रांतोत्थिताऽग्नि स्फुरत् ।

खद्योतोपमविस्फुलिङ्ग भसिता ब्रह्मेशशक्रोत्कराः ॥ २॥

इति श्रीमदानंदतीर्थ भगवत्पादाचार्य विरचितं

श्री नृसिंहनखस्तुतिः संपूर्णम्

॥ भारतीरमणमुख्यप्राणांतर्गत श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥

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