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पारंपरिक पाठ

प्रात:स्मरणम्

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प्रात:स्मरणम् [[लेखकः :|]]

प्रात:स्मरणम्

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसमप्रभ ।

निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ।। १ ।।

शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं ।

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् ।

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ।। २ ।।

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने ।

प्रणत्क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम: ।। ३ ।।

या कुन्देंदुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।

या वीणावरदंडमंडितकरा या श्वेतपद्मासना ।

या ब्रह्माच्युत्शंकरप्रभृतिभि: देवै सदा वन्दिता ।

सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाडयापहा ।। ४ ।।

ब्रह्मानंदं परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिम् ।

द्वंद्वातीतं गगनसदृशं, तत्त्वमस्यादिलक्षम् ।

एकं नित्यं विमलमचलं सर्वधी: साक्षीभूतम् ।

भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरूं तं नमामि ।। ५ ।।

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर: ।

गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवै नम: ।। ६ ।।

पुण्यश्लोको नलो राजा पुण्यश्लोको युधिष्ठिर: ।

पुण्यश्लोको विदेहश्च पुण्यशोको जनार्दन: ।। ७ ।।

अहिल्या द्रौपदी सीता तारा मंदोदरी तथा ।

पंचकन्या ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशनम् ।। ८ ।।

अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमानश्च विभीषण: ।

कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन: ।। ९ ।।

अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका ।

पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिका: ।। १० ।।

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके

शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोsस्तुते ।। ११ ।।

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