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पारंपरिक पाठ

श्रीज्ञानेश्वरस्तोत्रम्

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श्रीज्ञानेश्वरस्तोत्रम् अनंतराव आठवले

सद्गुरुं सच्चिदानन्दं केवलं करुणाकरम् |

ज्ञानयोगेश्वरं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || १ ||

वाङ्मनोबुद्धिभावानामतीतं परमेश्वरम् |

निष्कलं सगुणं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || २ ||

निर्मलं सदयं शांतं प्रणताखिलमङ्लम् |

ज्ञानैकरूपिणं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ३ ||

भक्तिकल्पतरोर्मूलं बीजं साधनसम्पदः |

सर्वलोकहितं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ४ ||

आविर्भूतो हरि: साक्षात् पावने गौतमीतटे |

रुपेण यस्य तं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ५ ||

निवृत्तिमार्गिणो मुक्ति: सोपानसुलभा कृता |

कृपया यस्य तं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ६ ||

ज्ञानं भक्तिरसं यस्य यद्भक्तिर्ज्ञानभास्वती |

तमद्वैतपरं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ७ ||

दृष्टि: कृपावती यस्य नित्यं पीयूषवर्षिणी

नताश्रयांघ्रिं तं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ८ ||

सुधाविजयिनी तापशमनी लोकपावनी

भारती यस्य तं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ९ ||

भावार्थदीपिका यस्य अनुभवामृतजीवनी

तं बुद्धिभास्करं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || १० ||

शरदिन्दुमनोज्ञाङ्गं कमलायतलोचनम् |

पद्मासनस्थितं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || ११ ||

प्रसन्नं परमोदारं वरदं सुस्मिताननम् |

आलन्दिवल्लभं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || १२ ||

सुहृदं सर्वभूतानां मातरं पितरं प्रभूम् |

प्रेमलं वत्सलं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || १३ ||

बुद्धिनद्या: शरत्कालं प्रग्रहं चित्तवाजिनः

पापतापहरं वन्दे ज्ञानदेवं पुनः पुनः || १४ ||

हे तात ! भवतैवोक्तं शिशोर्माता स्वयं हिता |

चित्तवृत्ते: समाधानं बुद्धे: स्थैर्यं सदाsस्तु मे || १५ ||

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श्रीज्ञानेश्वरस्तोत्रम् — sa.wikisource.org contributors

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