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विष्णु और कृष्ण

लक्ष्मीनारायणस्तोत्रम्

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लक्ष्मीनारायणस्तोत्रम् श्रीवासुदेवानन्दसरस्वती

।। लक्ष्मीनारायणस्तोत्रम्।।

श्रीनिवास जगन्नाथ श्रीहरे भक्तवत्सल।

लक्ष्मीपते नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्।।१।।

राधारमण गोविंद भक्तकामप्रपूरक

नारायण नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्।।२।।

दामोदर महोदार सर्वापत्तिनिवारण।

हृषीकेश नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्।।३।।

गरुडध्वज वैकुंठनिवासिन्केशवाच्युत।

जनार्दन नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्।।४।।

शंखचक्रगदापद्मधर श्रीवत्सलांछन।

मेघश्याम नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्।।५।।

त्वं माता त्वं पिता बंधुः सद्गुरुस्त्वं दयानिधिः।

त्वत्तो%न्यो न परो देवस्त्राहि मां भवसागरात्।।६।।

न जाने दानधर्मादि योगं यागं तपो जपम्।

त्वं केवलं कुरु दयां त्राहि मां भवसागरात्।।७।।

न मत्समो यद्यपि पापकर्ता न त्वत्समो%थापि हि पापहर्ता।

विज्ञापितं त्वेतदशेषसाक्षिन् मामुद्धरार्तं पतितं तवाग्रे।।८।।

।। इति श्री. प. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीलक्ष्मीनारायणस्तोत्रम् संपूर्णम् ।।

स्रोत, लाइसेंस और पाठ सूचना

लक्ष्मीनारायणस्तोत्रम् — sa.wikisource.org contributors

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