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दत्तात्रेय

श्रीदत्तस्तवस्तोत्रम्

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श्रीदत्तस्तवस्तोत्रम् श्रीवासुदेवानन्दसरस्वती

।। श्रीदत्तस्तवस्तोत्रम् ।।

भूतप्रेतपिशाचाद्या यस्य स्मरणमात्रतः।।

दूरादेव पलायन्ते दत्तात्रेयं नमामि तम्।।१।।

यन्नामस्मरणाद्दैन्यं पापं तापश्च नश्यति।।

भीतिग्रहार्तिदुःस्वप्नं दत्तात्रेयं नमामि तम्।।२।।

दद्रुस्फोटककुष्ठादि महामारी विषूचिका।।

नश्यन्त्यन्येsपि रोगाश्च दत्तात्रेयं नमामि तम्।।३।।

संगजा देशकालोत्था अपि सांक्रमिका गदाः।।

शाम्यन्ति यत्स्मरणतो दत्तात्रेयं नमामि तम्।।४।।

सर्पवृश्चिकदष्टानां विषार्तानां शरीरिणाम्।।

यन्नाम शांतिदं शीघ्रं दत्तात्रेयं नमामि तम्।।५।।

त्रिविधोत्पातशमनं विविधारिष्टनाशनम्।।

यन्नाम क्रूरभीतिघ्नं दत्तात्रेयं नमामि तम्।।६।।

वैर्यादिकृतमंत्रादिप्रयोगा यस्य कीर्तनात्।।

नश्यन्ति देवबाधाश्च दत्तात्रेयं नमामि तम्।।७।।

यच्छिष्यस्मरणात्सद्यो गतनष्टादि लभ्यते।।

य ईशः सर्वतस्त्राता दत्तात्रेयं नमामि तम्।।८।।

जयलाभयशःकामदातुर्दत्तस्य यः स्तवम्।।

भोगमोक्षप्रदस्येमं पठेद्दत्तप्रियो भवेत्।।९।।

।। इति श्री प. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतिविरचितं दत्तस्तवस्तोत्रं संपूर्णम् ।।

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श्रीदत्तस्तवस्तोत्रम् — sa.wikisource.org contributors

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