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पारंपरिक पाठ

श्रीदिनेशस्तवः

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श्रीदिनेशस्तवः [[लेखकः :|]]

शृङ्गगिरि निकटस्थ श्रीसूर्यनारायण देवस्थाने विरचितम्

मानससरोगतं मे

शोषय पङ्कं खरोस्र दिननाथ ।

नो चेत्खरत्वमेषा-

मस्राणां भूयात्कथं ब्रूहि ॥१॥

निवार्य बाह्यं परमन्धकारं

दिनेश गर्वं कुरुषे वृथा त्वम् ।

यद्यस्ति शक्तिस्तव मामकीन-

मन्तःस्थमान्ध्यं विनिवारयाशु ॥२॥

॥इति श्रीमच्छृङ्गेरी जगद्गुरु श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य अनन्तश्री सच्चिदानन्द शिवाभिनवनृसिंहभारती महास्वामिभिः शृङ्गगिरि निकटस्थ श्रीसूर्यनारायण देवस्थाने विरचितं श्रीदिनेश स्तवः॥

स्रोत, लाइसेंस और पाठ सूचना

श्रीदिनेशस्तवः — sa.wikisource.org contributors

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