होली
वसंत के रंग और मिलन का पर्व, जिसमें होलिका दहन और रंगोत्सव के अलग-अलग अनुष्ठान शामिल हैं।
दो जुड़े हुए अनुष्ठान
होलिका दहन और रंगों की होली जुड़े हुए, लेकिन अलग अनुष्ठान हैं। प्रह्लाद और होलिका की कथा इस पर्व से जुड़ी प्रसिद्ध भक्तिपरक कथा है; उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में कृष्ण परंपराओं का विशेष महत्व है। स्थानीय रिवाजों के कारण उत्सव एक दिन से अधिक चल सकता है।
संवेदनशील उत्सव
रंग लगाने से पहले सहमति लें और केवल देखना चाहने वालों का भी सम्मान करें। सामुदायिक अग्नि के लिए स्थानीय व्यवस्था का पालन करें। होलिका दहन और भद्रा से जुड़े समय का निर्णय विशेषज्ञ नियम-समीक्षा माँगता है। केवल पूर्णिमा का नाम हर स्थानीय अनुष्ठान का समय तय नहीं करता।
तिथि और पूजा समय अनुमोदित पर्व नियमों पर निर्भर हैं। इस परिचय में पर्व की तारीख नहीं दी गई है। संपादकीय समीक्षा लंबित।