प्रदोष
त्रयोदशी तथा सायंकाल से जुड़ा शिव उपासना का व्रत।
सायंकाल की आराधना
प्रदोष पूजन शिव और सूर्यास्त के आसपास के सायंकाल से जुड़ा है। परिवार प्रार्थना, दीप और परिचित शिव पाठ कर सकते हैं। वार के अनुसार नाम भी मिलता है, लेकिन केवल वार का नाम सही अवसर तय नहीं करता।
स्थानीय सायंकाल महत्वपूर्ण है
पंचांग को चुनी हुई स्थानीय सायंकाल परिभाषा के अनुसार त्रयोदशी का संबंध जाँचना चाहिए। लंबी या छोटी तिथियों में विशेष सावधानी चाहिए। नगर बदलकर भी वही घड़ी का समय देने से स्थानीय आधार छूट जाएगा; इसलिए यहाँ अनुष्ठान समय की समीक्षा शेष है।
तिथि और पूजा समय अनुमोदित पर्व नियमों पर निर्भर हैं। इस परिचय में पर्व की तारीख नहीं दी गई है। संपादकीय समीक्षा लंबित।