दुर्गा पूजा
देवी आराधना, कला और सामुदायिक सहभागिता का शारदीय उत्सव।
पूजा और समुदाय
दुर्गा पूजा में देवी प्रतिमा, अनुष्ठान, संगीत, भोजन और सामूहिक स्थान एक साथ आते हैं। सामुदायिक पंडाल भक्ति और शिल्प दोनों के केंद्र बनते हैं। दुर्गा और महिषासुर की कथा विनाशकारी शक्तियों पर विजय की पारंपरिक अभिव्यक्ति है।
स्थानीय क्रम का सम्मान
षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के क्रम में स्थानीय विशेष अनुष्ठान होते हैं। संधि पूजा एक निश्चित तिथि-संधि से जुड़ी होती है; इसका समय केवल दिन के सामान्य नाम से नहीं निकाला जा सकता। सत्यापित क्षेत्रीय पंचांग और आयोजक समुदाय की व्यवस्था का पालन करें।
तिथि और पूजा समय अनुमोदित पर्व नियमों पर निर्भर हैं। इस परिचय में पर्व की तारीख नहीं दी गई है। संपादकीय समीक्षा लंबित।